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राहु एक छाया ग्रह हैं

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राहु केतु एक ही व्यक्ति के दो अलग अलग भाग हैं। विष्णुपुराण के अनुसार विष्णु जी ने अपने सुदर्शन चक्र से राहु के सिर को धड़ से अलग कर दिया, किंतु अमृत पीने के कारण राहु का सिर कटने के बाद भी जीवित रहा। राहु का सिर राहु और धड़ केतु कहलाया  राहु एक छाया ग्रह हैं। इसकी महादशा अठारह वर्ष की होती। यह अशुभ प्रभाव देने वाला ग्रह हैं। इसकी शांति के लिए महामृत्युंजय मंत्र का नियमित जाप करना चाहिए  राहु का वर्ण काला और मुख भयंकर है। इनके सिर पर स्वर्ण मुकुट, गले में स्वर्ण माला और शरीर पर काले वस्त्र सुशोभित होते है इनका प्रिय वाहन सिंह है। यह अपने हाथों में त्रिशूल,तलवार, ढाल और वर मुद्रा धारण करते हैं।  राहु के धड़ ने भी एक रूप धारण किया यह रूप केतु कहलाया। केतु का वर्ण धूम्र और आकृति विकृत है। राहु के समान इनके सिर पर भी स्वर्ण मुकुट और गले में स्वर्ण माला सुशोभित है। इनके दो हाथ हैं, जिनमें गदा और वरमुद्रा सुशोभित हैं। इनका वाहन गिद्ध है  राहु की अपेक्षा केतु साधकों के लिए अधिक लाभकारी, फलदाई और शुभ होता हैं। केतु की महादशा सात वर्ष की होती है। जिस व्यक्ति के लिए यह अशुभ होत...

भगवान श्रीकृष्ण के जन्म लेने से पहले योगमाया ने क्या किया

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 पौराणिक कथाओं के अनुसार द्वापर युग में कंस अपने पिता को कारागार में डाल दिया और खुद मथुरा का राजा बन गया कंस की एक चचेरी बहन देवकी थी जब कंस अपनी  नवविवाहिता बहन देवकी को और उनके पति वसुदेव को रथ में उनके घर ले जा रहा था, उसी समय उसने एक आकाशवाणी सुनी, जिसमें यह भविष्यवाणी की गई थी कि देवकी का आठवां पुत्र उसका संहार करेगा। क्रूर कंस ने तुरन्त ही देवकी को मारने के लिए अपनी तलवार निकाली,  वसुदेव कंस से बोले देवकी को मत मारिए देवकी जब पुत्र को जन्म देगी तो मैं तुरन्त उसके पुत्र को आपके पास ले आऊंगा कंस ने देवकी और वसुदेव को कारागार में डाल दिया कंस ने देवकी के 6 पुत्रों को जन्म लेते ही मार दिया देवकी जब सातवीं बार गर्भवती हुई तब श्रीभागवन योगमाया से बोले देवकी और वसुदेव कंस के कारागार में बंदी हैं और इस समय मेरा पूर्ण अंश, शेष, देवकी के गर्भ में है। तुम शेष को देवकी के गर्भ से रोहणी के गर्भ में स्थानांतरित कर सकती हो उसके बाद मैं समस्त शक्तियों के सहित स्वयं देवकी के गर्भ में अवतरित होने जा रहा हूं फ़िर मैं देवकी और वसुदेव के पुत्र के रूप में प्रगट होऊंगा। तब तुम गोकुल में ...

कल्याणेश्वर महादेव का रहस्यमयी मन्दिर

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शिवलिंग पर जल अर्पित करते ही हो जाता गायब  कल्याणेश्वर महादेव मंदिर के चमत्कारी रहस्य !  कल्याणेश्वर महादेव का रहस्यमयी मन्दिर  कल्याणेश्वर महादेव मन्दिर के रहस्य और चमत्कार आज तक कोई नहीं समझ पाया दिल्ली से लगभग 90 किलोमीटर दूर बसा हैं। कल्याणेश्वर महादेव का रहस्यमयी मन्दिर  शिवलिंग पर जल अर्पित करते ही हो जाता हैं गायब  शिवलिंग पर अर्पित जल जाता कहा है। कहा गायब हो जाता हैं। आज तक कोई समझ नहीं पाया। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गढ़मुक्तेश्वर में  गंगा के तट पर तीन शिवलिंगों को भगवान परशुराम ने स्थापित किया था मुक्तेश्वर महादेव,झारखंडेश्वर महादेव, और कल्याणेश्वर महादेव।  धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गढ़मुक्तेश्वर में ये सबसे प्राचीन मन्दिर हैं।  कल्याणपुर गांव में सांप इधर उधर दिखते रहते हैं, मन्दिर के आस पास भी दिखते रहते हैं। लेकिन वे कल्याणपुर गांव के लोगों को काटते नहीं अगर कभी किसी को सांप ने काट  लिया तो उनकी मृत्यु नहीं होती  कल्याणेश्वर महादेव मंदिर में भक्त जल दूध शिवलिंग पर अर्पित करते हैं तो जल भूमि में समा जाता हैं आज तक इस र...

रक्षाबंधन कब है 2025 में

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इस साल रक्षाबंधन 9 अगस्त को है 2025 में  रक्षाबंधन का त्यौहार देश भर में बड़े धूमधाम से मनाया जाता हैं। रक्षाबंधन भाई बहन के अटूट प्रेम और विश्वास का त्यौहार है। रक्षाबंधन के दिन बहन अपने भाई के कलाई में राखी बांधती हैं बहन अपने भाई के लिए लम्बी आयु और अच्छे भविष्य की कामना करती हैं भाई अपनी बहन को सदा उसकी रक्षा करने की बचन देता हैं। भाई बहन के अटूट प्रेम रक्षा और विश्वास के बंधन का प्रतीक रक्षाबंधन का त्यौहार देश भर में धूमधाम से मनाया जाता हैं रक्षाबंधन के पर्व पर भाई अपनी बहन से राखी बधवाता हैं और अपनी बहन को उपहार देता है। हिंदू पंचांग के अनुसार रक्षाबंधन का पर्व हर साल श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता हैं 9 अगस्त को रक्षाबंधन हैं राखी बांधने का शुभ मुहूर्त 9 अगस्त सुबह 5 बजकर 35 मिनट से दोपहर 1 बजकर 24 मिनट तक रहेगा । भद्राकाल में  राखी क्यों नहीं बांधते  भद्रा सूर्यदेव छाया की पुत्री और शनिदेव की बहन थीं भद्राकाल को अशुभ माना जाता हैं भद्रा को उग्र स्वभाव की देवी माना जाता हैं इस लिए भद्राकाल में राखी नहीं बांधते।  धर्मिक मान्यताओं के अनुसार श्री गणेश...

नाग पंचमी कब है 2025 में

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नाग पंचमी इस साल 29 जुलाई को मनाया जाएगा 2025 में  हिंदू धर्म में नाग पंचमी का विषेष महत्व है। हर साल यह त्योहार सावन मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी को मनाया जाता हैं  नाग पंचमी के दिन नाग देवता और भगवान शंकर की विशेष पूजा की जाती हैं। नाग पंचमी के दिन सांपों को दूध फूल और मिठाई अर्पित किया जाता हैं  नाग पंचमी के दिन व्रत और पूजा भी की जाती हैं।  नाग पंचमी के दिन सांपों की पूजा करने से कुटुम्ब को सांपों के डर से मुक्ति मिलता हैं।  कहीं कहीं उस दिन पूजा करने के बाद पूरे घर में दूध लावा छिड़कते हैं  नाग पंचमी का त्यौहार इस साल 29 जुलाई मंगलवार 2025 को मनाया जाएगा  इस दिन कालसर्प दोष की शान्ति के लिए शिव पूजन करने का विशेष विधान है  नाग पंचमी के दिन गरीबों को अन्न वस्त्र और धन का दान देने से शुभ फल प्राप्त होता हैं लोकमान्यताओं के अनुसार  लोकमान्यताओं के अनुसार राजा परीक्षित की मृत्यु सांप के काटने से हुआ था राजा परीक्षित पुत्र जनमेजय ने सांपो को मारने के लिए यज्ञ करने लगे सांपो को बचाने के लिए मनसा देवी और ऋषि जरत्कारु के पुत्र आस्तिक ने जनमेजय से ...

सावन का पहला सोमवार कब है

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सावन का महीना शिवजी को क्यों प्रिय हैं  धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माता पार्वती ने शिवजी को पाने के लिए कठोर तप किया था और सावन सोमवार का व्रत किया था, भगवान शंकर देवी पार्वती के तपस्या से प्रसन्न होकर देवी पार्वती को पत्नी रूप में  स्वीकार किया था तभी से सावन सोमवार का विशेष महत्व है। इस साल सावन मास की शुरुआत 11 जुलाई शुक्रवार 2025 में हो रहा हैं सावन का पहला सोमवार 14 जुलाई को पड़ेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन में श्रद्धा से की गई पूजा भगवान शंकर को अत्यंत प्रिय होती हैं  भगवान शिव भक्तों की हर मनोकामनाएं पूरी करते है सावन के पहले सोमवार को प्रथम श्रावणी सोमवार कहा जाता हैं हिंदू धर्म में सावन सोमवार का विशेष महत्व है शिव भक्त इस दिन उपवास रखते हैं, और पूरे विधि विधान से भगवान शंकर की पूजा करते हैं  शिवपुराण में कहा गया है कि सावन के महीने में शिवलिंग पर जल अर्पित करने से विशेष पुण्य मिलता है। यह महीना पूरी तरह से भगवान शिव की पूजा को समर्पित होता है ऐसा माना जाता है कि सावन के महीने में सच्चे मन से शिवजी की पूजा करने से दुखों का नाश होता है और जीवन में सु...

गौतम ऋषि अपनी पत्नी अहिल्या को पत्थर बनने का शाप क्यों दिया

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गौतम ऋषि अपनी पत्नी अहिल्या के साथ आश्रम में रहते थे  ऋषि की  पत्नी अहिल्या बहुत सुंदर थी। गौतम ऋषि प्रतिदिन भोर में गंगा स्नान करने जाते थे  अहिल्या की सुंदरता को देखकर देवराज इंद्र अहिल्या पे मोहित हो गए  देवराज इंद्र ने अहिल्या के साथ छल किया  गौतम ऋषि जब भोर में गंगा स्नान के लिए गए  देवराज इंद्र उसी समय गौतम ऋषि का रूप धारण कर के अहिल्या के पास आए अहिल्या को लगा मेरे स्वामी आ गए हैं देवराज इंद्र ने अहिल्या के साथ छल किया  उसी समय गौतम ऋषि अपने आश्रम में आए  गौतम ऋषि क्रोध में इंद्र से बोले कौन हो तुम मुझे अपना असली रूप दिखाओ ऋषि बने इंद्र गौतम ऋषि के सामने देवराज इंद्र के रूप में प्रगट हुए  गौतम ऋषि ने देवराज इंद्र को शाप दिया जिस वासना के लिए तुमने ये पाप किया है आज से तू उसके योग्य नहीं रहेगा  अहिल्या ऋषि से बोली स्वामी मुझे क्षमा करें  इंद्र ने मेरे साथ छल किया इसमें मेरी कोई गलती नहीं है  गौतम ऋषि ने अपनी पत्नी अहिल्या की एक भी बात नहीं सुनी गौतम ऋषि ने अपनी पत्नी अहिल्या को पत्थर बनने का शाप दे दिया  ऋषि पत्नी अह...