26 फरवरी को महाशिवरात्रि है।

शिव किसे कहते हैं।
जिसमें सारा जगत शयन करता हैं, जो विकार रहित है। वह शिव है
जो अमंगल का नाश करते हैं वे ही सुखमय मंगल रूप भगवान शिव है।
जो सारे जगत को अपने अन्दर लीन कर लेते है। वे ही करुणा सागर भगवान शिव है।
जो भक्तों को अपनी गोद में रखते हैं वहीं भगवान शिव है
जिनसे समस्त विद्याएं निकलती है। जिनकी महिमा का वर्णन करना मनुष्य की शक्ति के बाहर है। वह भगवान शिव है।
महाशिवरात्रि का पर्व धार्मिक कथाओं के अनुसार
भगवान शिव माता पार्वती का विवाह इसी दिन हुआ था इस लिए महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जाता हैं
भगवान शंकर समुद्र से निकले जहर को क्यों पीया
समुद्र से अमृत पाने के लिये देवताओं ने समुद्र मंथन करवाया
अमृत से पहले समुद्र मंथन से हलाहल नामक विष निकला हलाहल विष में ब्रह्माण्ड को नष्ट करने की क्षमता थी भगवान शिव ने हलाहल विष को अपने कण्ठ में रख लिया जहर इतना शक्तिशाली था की भगवान शंकर अत्यधिक दर्द से पीड़ित हो उठे और उनका गला नीला हो गया
उपचार के लिए चिकित्सकों ने देवताओं को भगवान शिव को रात भर जगाने की सलाह दी भोलेनाथ को जगाए रहने के लिये देवताओं ने नृत्य और संगीत बजाए। सुबह होते ही भगवान शंकर उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर उन सभी को आशीर्वाद दिया भोलेनाथ ने समुद्र मंथन से निकले जहर को पी कर दुनिया को बचाया धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस लिए भी शिवरात्रि मनाई जाती है।धार्मिक कथाओं के अनुसार इस व्रत से एक कथा और जुड़ी हुई है।एक शिकारी वन में शिकार के लिये गया, सारे दिन भूखा प्यासा रहा, रात हो गईं। एक बेल के पेड़ के ऊपर चढ़ गया वृक्ष के नीचे शिवलिंग था। रात्रि में एक बेल शिकारी को छूते हुए शिवलिंग पे गिर पड़ा।भूखा रहने से उपवास तो शिकारी का हो चुका था। बेल शिवलिंग पर स्वत: चढ़ गया। उसी को उसका व्रत मानकर उसका उद्धार हो गया भगवान शंकर के साथ कैलाश शिखर पर विराजमान मां पार्वती भोलेनाथ से पूछतीं हैं ,
हेप्रभु धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष सब आपही हैं।साधना से प्रसन्न होकर आप मनुष्य को सब कुछ देते हो, हे प्रभु मेरी इच्छा यह जाननें की है।आप किस कर्म,किस व्रत, और किस तपस्या, से प्रसन्न होते हैं
भगवान शंकर पार्वती से कहते हैं।फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर जिस अन्धकारमयी रजनी का उदय होता हैं। उसी को शिवरात्रि, कहते हैं। उस दिन उपवास करने से मैं प्रसन्न होता हूँ कृष्ण चतुर्दशी फाल्गुन मास में ही पड़ती हैं धार्मिक मान्यताओं के अनुसार उसी चतुर्दशी महानिशा में आदि देव महादेव शिवलिंग के रूप में प्रगट हुए थे।
श्री शिवाय नमस्तुभयम
ReplyDeleteओम नमः शिवाय
ReplyDeleteOm namah shivaay
ReplyDeleteओम नमः शिवाय 🙏
ReplyDeleteजय शिव शंकर
ReplyDeleteअत्यंत सुंदर
ReplyDelete🙏🙏
ReplyDelete